बुधवार, 26 अक्तूबर 2016

ग्लोइंग स्किन पाने के लिए सुबह खाली पेट पिएं एलोवेरा जूस।

एलोवेरा एक औषधीय पौधा है। सुबह-सुबह खाली पेट एलोवेरा का जूस पीने से कई फायदे होते हैं। आपको बता दें कि आपकी स्किन के लिए बहुत अच्छा होता है और ये जोड़ों के दर्द में भी राहत देता है। एलोवेरा का ग्वारपाठा, घृत कुमारी, गिलोय भी कहा जाता है। स्किन प्रोब्लम से छुटकारा दिलाने के अलावा एलोवेरा आपकी सेहत के लिए भी गुणकारी है। एलोवेरा से मुहांसे, रूखी त्वचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों और आखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है।

शनिवार, 16 अप्रैल 2016

सेक्स किए बिना पैदा होंगे स्वस्थ बच्चे

 अब भविष्य में बच्चे पैदा करने के लिए सेक्स की जरुरत नहीं होगी। 'डिजाइनर बेबी' की अवधारणा आने के बाद बच्चे पैदा करने के लिए सेक्स की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। साथ ही आप कई पहलुओं पर परखने के बाद अपनी मर्जी के बच्चे का चुनाव कर सकेंगे।

रविवार, 7 जून 2015

ब्लडप्रेशर की शिकायत हो तो .........

यह मौसम हाई और लो ब्लडप्रेशर वाले लोगों के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। लो ब्लडप्रेशर वाले लोगों की सांसों की गति धीमी पड़ जाती है।

मंगलवार, 14 अक्तूबर 2014

अनेक दुःखों में कारगर है हल्दी।

हल्दी अपने औषधीय और सौंदर्यवर्धक
गुणों के कारण रसोई की शान रही है। चटक
पीले रंग के कारण भारतीय केसर के नाम से
भी प्रसिद्ध हल्दी पौष्टिक गुणों से
भरी हुई है।

हड्डियों को मजबूत बनाए:- रात को सोते समय हल्दी की एक इंच लंबी कच्ची गांठ को एक गिलास दूध में उबालें। थोड़ा ठंडा होने पर इसे पी लें।

ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोगों का खतरा कम होता है।

गठिया का इलाज:- हल्दी इस रोग के इलाज के लिए अनूठा घरेलू प्राकृतिक उपाय है। सुबह
खाली पेट एक गिलास गर्म दूध में एम चम्मच
हल्दी मिलाकर पीने से गठिया के दर्द में
राहत मिलती है।

एनीमिया के उपचार में प्रभावी:- लोहे से समृद्ध हल्दी एनीमिया के इलाज के प्राकृतिक उपायों में एक है। कच्ची हल्दी से निकाला गया आधा चम्मच रस एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पीना फायदेमंद है।

दंत रोगों में गुणकारी:- थोड़ी-सी हल्दी, नमक और सरसों का तेल मिलाएं। दांतों को मजबूत बनाने के लिए रोजाना इस मिश्रण से दांतों और
मसूड़ों की ब्रशिंग करें।
कच्ची हल्दी की गांठ को अच्छी तरह भूनकर पीस लें। पिसे मिश्रण से दर्द वाले दांत की मालिश करें। आराम मिलेगा। कच्ची हल्दी के कसैले रस से मालिश करने पर दांत और मसूड़े मजबूत होते हैं, उनकी सूजन दूर होती है और दांत के कीड़े खत्म हो जाते हैं।

मुंह के छालों से छुटकारा:- एक गिलास पानी में कुछ हल्दी मिला कर कुल्ला करने से मुंह के छालों में आराम मिलता है।

खांसी में राहत:- खांसी में कफ की समस्या होने पर एक गिलास गर्म दूध में एक-चौथाई चम्मच
हल्दी मिलाकर पीना फायदेमंद है। पुरानी खांसी या अस्थमा के लिए आधा चम्मच शहद में एक-चौथाई चम्मच हल्दी अच्छी तरह मिलाकर चाटने से आराम मिलता है।

गुमचोट के इलाज में सहायक:-एक गिलास गर्म दूध में एक टी-स्पून हल्दी मिलाकर पीने से चोट के दर्द और सूजन में राहत मिलती है। चोट पर हल्दी और पानी का लेप लगाने से आराम मिलता है। आधा लीटर गर्म पानी, आधा चम्मच सेंधा नमक और एक चम्मच हल्दी डाल कर अच्छी तरह मिलाएं। इस पानी में एक कपड़ा डाल कर निचोड़ लें और चोट वाली जगह पर इससे सिंकाई करें।

घावों पर मरहम:- घी या तेल में हल्दी मिलाएं। इसे थोड़ा गर्म करके घाव के ऊपर लगाकर
ड्रेसिंग करें। हल्दी को पानी के साथ मिक्स करके भी घाव पर मोटा लेप लगाने से आराम मिलता है। इससे घाव का बहता हुआ खून भी रुक सकता है।

टाइप 2 के मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद:-
हल्दी में मौजूद कुरकूमिन ब्लड शुगर को कम
करता है और ग्लूकोज के चयाचपय को बढ़ाकर मधुमेह को नियंत्रित रखता है। दिन में भोजन के साथ आधा-आधा चम्मच हल्दी पाउडर के सेवन से आराम मिलता है।

मंगलवार, 22 जुलाई 2014

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने की धारणा के पीछे की वास्तविकता का वैज्ञानिक समर्थन !

हममें से ज्यादातर लोगों ने अपने दादा-दादी से तांबे के बर्तन में संग्रहीत पानी पीने के स्वास्थ्य लाभों के बारे में सुना होगा। कुछ लोग तो पानी पीने के लिए विशेष रूप से तांबे से बने गिलास और जग का उपयोग करते हैं। लेकिन क्या इस धारणा के पीछे वास्तव में कोई वैज्ञानिक समर्थन है? या यह एक मिथक है बस? तो आइए तांबे के बर्तन में पानी पीने के बेहतरीन कारणों के बारे में जानें..

तांबे के बर्तन में पानी पीना अच्छा क्यों है?

आयुर्वेद के अनुसार, तांबे के बर्तन में संग्रहीत पानी में आपके
शरीर में तीन दोषों (वात, कफ और पित्त) को संतुलित
करने की क्षमता होती है और यह ऐसा सकारात्मक
पानी चार्ज करके करता है। तांबे के बर्तन में
जमा पानी 'तमारा जल' के रूप में भी जाना जाता है और
तांबे के बर्तन में कम से कम 8 घंटे तक रखा हुआ
पानी ही लाभकारी होता है।
जब पानी तांबे के बर्तन में संग्रहित किया जाता है तब
तांबा धीरे से पानी में मिलकर उसे सकारात्मक गुण प्रदान
करता है। इस पानी के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह
कभी भी बासी (बेस्वाद) नहीं होता और इसे लंबी अवधि तक
संग्रहित किया जा सकता है।

बैक्टीरिया समाप्त करने में मददगार

तांबे को प्रकृति में ओलीगोडिनेमिक के रूप में
(बैक्टीरिया पर धातुओं की स्टरलाइज प्रभाव)
जाना जाता है और इसमें रखे पानी के सेवन से
बैक्टीरिया को आसानी से नष्ट
किया जा सकता है। तांबा आम जल जनित रोग जैसे
डायरिया, दस्त और पीलिया को रोकने में मददगार
माना जाता है। जिन देशों में
अच्छी स्वच्छता प्रणाली नहीं है उन देशों में
तांबा पानी की सफाई के लिए सबसे सस्ते समाधान
के रूप में पेश आता है।










शुक्रवार, 20 जून 2014

ज्यादा उम्र तक जीने राज !

मनोवैज्ञानिक भी कहते हैं कि लंबी उम्र का राज आपकी लाइफस्टाइल में नहीं, आपके विचारों में छिपा है. अगर आपके विचार सकारात्मक होंगे, आप जिन्दगी के प्रति बेहतर दृष्टिकोण रखेंगे तो निश्चित तौर पर यह आपकी आयु सीमा को बढ़ाएगा. आप अपने विचारों से स्वस्थ रहेंगे तो इसका प्रभाव आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा. फिर इस बात से क्या फर्क पड़ता है कि आज सुबह आप मॉर्निंग वॉक पर गए थे या नहीं, हेल्दी खाना खाया था नहीं, व्यायाम किया था नहीं, कहीं शराब ज्यादा तो नहीं पी ली, सिगरेट का सेवन ज्यादा तो नहीं हो गया….!!!

मंगलवार, 17 जून 2014

केवल चार घंटे का जीवन है दिल का।

दिल को सिर्फ 4 घंटे तक ही सुरक्षित रख सकते हैं। इसे जितनी जल्दी मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट कर दिया जाए,उतने ही ऑपरेशन के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।

रविवार, 2 मार्च 2014

अब खून की जाँच से ही पता चल सकेगा कैंसर (ट्यूमर) का।

न्यूयॉर्क/ भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक रघु कल्लुरी द्वारा किए गए शोध में पता चला है कि खून की सामान्य जांच से ही अग्न्याशय कैंसर के बारे में पता लगाया जा सकता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के एमडी एंडरसन डिपार्टमेंट ऑफ कैंसर बायोलॉजी में प्राफेसर कल्लुरी ने बताया। इस शोध से डॉक्टरों को खून की जांच से ही कैंसर का पता लगाने और उसके इलाज में मदद मिलेगी।

हमारा मानना है कि खून के नमूने से लिए गए एक्सोसोम (छोटे कण) डीएनए के विश्लेषण से शरीर में किसी भी स्थान पर कैंसर ट्यूमर के बारे में पता लगाया जा सकता है। इससे शरीर में होने वाले बदलाव के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए ट्यूमर के सैंपल की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इससे प्रारंभिक चरण में कैंसर का पता लगाने की हमारी क्षमता में वृद्धि होगी और इस बीमारी के प्रभावी इलाज की संभावना बढ़ जाएगी।' उनके मुताबिक वर्तमान समय में खून की वैसी कोई जांच उपलब्ध नहीं है जिसके आधार पर कैंसर संबंधी डीएनए विकृति का पता लगाया जा सके। यह अध्ययन जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित हुआ है।

वहीं अमेरिका में केंटुकी स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ लूसविले के शोधकर्ताओं ने भी खून की जांच से सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने संबंधी खोज की बात कही है। उनका कहना है कि खून की जांच से यह भी पता लगाया जा सकता है कि सर्वाइकल कैंसर किस चरण में है। खबर कैसी लगी

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